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Showing posts from June, 2018

श्री बजरंग बाण

दोहा : निश्चय प्रेम प्रतीति ते, बिनय करैं सनमान। तेहि के कारज सकल शुभ, सिद्ध करैं हनुमान॥ चौपाई : जय हनुमंत संत हितकारी। सुन लीजै प्रभु अरज हमारी॥ जन के काज बिलंब न कीजै। आतुर दौरि महा सुख दीजै॥ जैसे कूदि सिंधु महिपारा। सुरसा बदन पैठि बिस्तारा॥ आगे जाय लंकिनी रोका। मारेहु लात गई सुरलोका॥ जाय बिभीषन को सुख दीन्हा। सीता निरखि परमपद लीन्हा॥ बाग उजारि सिंधु महँ बोरा। अति आतुर जमकातर तोरा॥ अक्षय कुमार मारि संहारा। लूम लपेटि लंक को जारा॥ लाह समान लंक जरि गई। जय जय धुनि सुरपुर नभ भई॥ अब बिलंब केहि कारन स्वामी। कृपा करहु उर अंतरयामी॥ जय जय लखन प्रान के दाता। आतुर ह्वै दुख करहु निपाता॥ जै हनुमान जयति बल-सागर। सुर-समूह-समरथ भट-नागर॥ ॐ हनु हनु हनु हनुमंत हठीले। बैरिहि मारु बज्र की कीले॥ ॐ ह्नीं ह्नीं ह्नीं हनुमंत कपीसा। ॐ हुं हुं हुं हनु अरि उर सीसा॥ जय अंजनि कुमार बलवंता। शंकरसुवन बीर हनुमंता॥ बदन कराल काल-कुल-घालक। राम सहाय सदा प्रतिपालक॥ भूत, प्रेत, पिसाच निसाचर। अगिन बेताल काल मारी मर॥ इन्हें मारु, तोहि सपथ राम की। राखु नाथ मरजाद नाम की॥ सत्य होहु हरि सपथ पाइ कै। राम दूत धरु मारु धाइ कै॥ जय ज...

Hanuman Chalisa Hindi

॥दोहा॥ श्रीगुरु चरन सरोज रज निज मनु मुकुरु सुधारि । बरनउँ रघुबर बिमल जसु जो दायकु फल चारि ॥ बुद्धिहीन तनु जानिके सुमिरौं पवन-कुमार । बल बुधि बिद्या देहु मोहिं हरहु कलेस बिकार ॥ ॥चौपाई॥ जय हनुमान ज्ञान गुन सागर । जय कपीस तिहुँ लोक उजागर ॥१॥ राम दूत अतुलित बल धामा । अञ्जनि-पुत्र पवनसुत नामा ॥२॥ महाबीर बिक्रम बजरङ्गी । कुमति निवार सुमति के सङ्गी ॥३॥ कञ्चन बरन बिराज सुबेसा । कानन कुण्डल कुञ्चित केसा ॥४॥ हाथ बज्र औ ध्वजा बिराजै । काँधे मूँज जनेउ साजै ॥५॥ सङ्कर सुवन केसरीनन्दन । तेज प्रताप महा जग बन्दन ॥६॥ बिद्यावान गुनी अति चातुर । राम काज करिबे को आतुर ॥७॥ प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया । राम लखन सीता मन बसिया ॥८॥ सूक्ष्म रूप धरि सियहिं दिखावा । बिकट रूप धरि लङ्क जरावा ॥९॥ भीम रूप धरि असुर सँहारे । रामचन्द्र के काज सँवारे ॥१०॥ लाय सञ्जीवन लखन जियाये । श्रीरघुबीर हरषि उर लाये ॥११॥ रघुपति कीह्नी बहुत बड़ाई । तुम मम प्रिय भरतहि सम भाई ॥१२॥ सहस बदन तुह्मारो जस गावैं । अस कहि श्रीपति कण्ठ लगावैं ॥१३॥ सनकादिक ब्रह्मादि मुनीसा । नारद सारद सहित अहीसा ॥१४॥ जम कुबेर दिगपाल जहाँ ते । कबि कोबिद कहि सके ...

Hanuman Ashtak Hindi

बाल समय रवि भक्षी लियो तब, तीनहुं लोक भयो अंधियारों I  ताहि सों त्रास भयो जग को, यह संकट काहु सों जात  न टारो I  देवन आनि करी बिनती तब, छाड़ी दियो रवि कष्ट निवारो I  को नहीं जानत है जग में कपि, संकटमोचन नाम तिहारो I को - १ बालि की त्रास कपीस बसैं गिरि, जात महाप्रभु पंथ निहारो I  चौंकि महामुनि साप दियो तब , चाहिए कौन बिचार बिचारो I  कैद्विज रूप लिवाय महाप्रभु, सो तुम दास के सोक निवारो I  को - २ अंगद के संग लेन गए सिय, खोज कपीस यह बैन उचारो I  जीवत ना बचिहौ हम सो  जु , बिना सुधि लाये इहाँ पगु धारो I  हेरी थके तट सिन्धु सबे तब , लाए सिया-सुधि प्राण उबारो I  को - ३ रावण त्रास दई सिय को सब , राक्षसी सों कही सोक निवारो I  ताहि समय हनुमान महाप्रभु , जाए महा रजनीचर मरो I  चाहत सीय असोक सों आगि सु , दै प्रभुमुद्रिका सोक निवारो I  को - ४  बान लाग्यो उर लछिमन के तब , प्राण तजे सूत रावन मारो I  लै गृह बैद्य सुषेन समेत , तबै गिरि द्रोण सु बीर उपारो I  आनि सजीवन हाथ  दिए तब , लछिमन के तुम प्रान उबारो I को - ५  रावन जुध अजान कियो तब , नाग कि फाँस सबै सिर डारो I  श्रीरघुनाथ समेत सबै दल , मोह भयो यह सं...